Lesson 11 पाठ्य सहगामी क्रियाएं

Lesson 11 पाठ्य सहगामी क्रियाएं
1- पाठ्य सहगामी क्रियाएं
पाठ्य सहगामी क्रियाएं छात्रों को अच्छा नागरिक बनने का प्रशिक्षण देती हैं । ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को स्कूल में व्यस्त रखती है। पाठ्य सहगामी क्रियाएं शिक्षण में श्रेष्ठ स्थान रखती है और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में पूरा-पूरा योगदान देती है। इनमें शामिल होकर छात्र अपने गुणों की क्षमता से आगे निकलकर विकास करता है। उनमें आत्मनिर्भरता आती है। वे किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए सक्षम बनते है।

2-भारतीय शिक्षा का दार्शनिक आधार

हमारे जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति हैं ’’ सा विद्या या विमुक्तये ’’ के ध्येय वाक्य के अनुसार लक्ष्य की पूर्ति मानव का मानव से प्रेमपूर्ण सहयोगी सम्बन्ध योग्य समाज की रचना एवं समाज व्यवस्था का सफल संचालन करना है ।
1. चार पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष)
2. एकात्म तत्व (सर्वव्यापक परमात्मा, आत्मवत सर्वभूतेषु )
3. कर्मवाद (यज्ञभाव से शुभ कर्म करना, अषुभ कर्मो का त्याग)
4. पुनर्जन्म (कर्म के आधार पर पुनर्जन्म होता है )
5. प्रकृति समन्वय - व्यक्ति, प्रकृति एवं समाज परस्पर पूरक है
6. बसुधैव कुटुम्बकम - व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र, विष्व एवं चराचर सृष्टि का विचार ।
7. चार आश्रम - ब्रह्मचर्य, ग्रहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास


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